माँओं को अक्सर सलाह दी जाती है कि शिशु के शुरुआती छह महीनों में वे उसे अनन्य स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) ही कराएं।
अगर आपके शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है और उसका वजन भी बढ़ रहा है, साथ ही साथ आप भी स्वस्थ हैं और स्तनपान की दिनचर्या से खुश हैं तो बेहतर है कि शिशु के छह माह का होने पर ही ठोस आहार की शुरुआत की जाए।
छह महीने का होने पर शिशु का वजन जन्म वजन से दोगुना हो गया होगा और आप शायद पाएंगी कि वह पूरे समय सक्रिय व क्रियाशील रहने लगा है। छह महीने होने के बाद, केवल स्तन दूध या फॉर्मूला दूध से आपके क्रियाशील और बढ़ते शिशु को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसलिए आपको धीरे-धीरे विविध आहार देना शुरु करने की जरुरत पड़ेगी।
हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि शिशु को ठोस आहार जल्दी शुरू करने की जरुरत पड़ सकती है। डॉक्टर शिशु को चार से छह महीने की उम्र में ठोस आहार शुरु करने की सलाह दे सकते हैं, यदि:
शिशु का पर्याप्त वजन नहीं बढ़ रहा
वह फॉर्मूला दूध पीता है
ज्यादा बार दूध पिलाने के बाद भी वह भूखा सा लगता है
यदि किसी चिकित्सकीय कारण से शिशु को छह महीने से पहले ठोस आहार खिलाना शुरु करना पड़े, तो भी सलाह यही दी जाती है कि शुरुआती चार महीनों तक तो शिशु को केवल स्तनपान ही कराया जाए।
शिशुओं को जल्दी चार महीने पूरा होने से पहले (17 सप्ताह से पहले) ठोस आहार नहीं खिलाना चाहिए। उनमें अभी इतना शारीरिक कौशल नहीं होता कि वे ठोस आहार को सुरक्षित निगल सकें और उनकी पाचन प्रणाली भी अभी विकसित हो रही होती है। इसलिए इस चरण पर कुछ भोजन उन्हें खिलाना सुरक्षित नहीं है।
ध्यान रखें कि शिशु के पहले साल में ठोस आहार स्तनदूध या फॉर्मूला दूध से मिलने वाले पोषण की पूर्ति नहीं कर सकता। ये अभी भी शिशु के मुख्य पेय होंगे और शिशु के एक साल का होने तक ये उसके आहार का मुख्य हिस्सा होंगें। इसके बाद शिशु को गाय का दूध देना शुरु किया जा सकता है।
इस सबके बावजूद, यह भी सच है कि हर शिशु अलग होता है। इसलिए बच्चे का दूध छुड़वाने का सही समय क्या रहेगा, इस बारे में डॉक्टर से बात करें।
शिशु अक्सर फार्मूला से ठोस आहार की ओर परिवर्तन कब करते हैं?