सुलाने की दिशा बदलती रहें-
बच्चे सोते वक्त कम हिलते-डुलते हैं। आप उसके सिर का डायरेक्शन हर एक घंटे में बदलती रहें। इससे उसकी पोजीशन अलग-अलग समय में बदली रहेगी। इस तरह उसके सिर के एक हिस्से में दबाव भी नहीं बनेगा।
अलग-अलग जगह सुलाएं-
बच्चे की सोने जगह बदलती रहें। आमतौर पर मांएं ऐसा नहीं करती हैं। जबकि बच्चे के लिए जरूरी है कि वह अपने आसपास अलग-अलग चीजें देखे। इससे वह जगे होने पर अपने आसपास नई चीजें देखने के लिए अपनी गर्दन खुद हिलाएगा। हिलते-डुलते रहने से सिर के चपटा होने की आशंका खुद ब खुद कम हो जाएगी।
बच्चे के लिए ऐसा तकिया लें, जो सपाट हो। टेढ़ा-मेढ़ा तकिया बच्चे को सोने के लिए न दें। इससे बच्चे को असहजता होगी और उसको नींद भी अच्छी नहीं आएगी। इसका असर उसके सिर के शेप पर भी पड़ेगा।
बच्चे को गोद में सुलाएं-
छोटे बच्चे लगभग पूरा दिन सोते हैं। बहुत कम समय ऐसा होता है, जब बच्चे जगे रहते हैं। सोने के दौरान जाहिर है बच्चे पूरा समय बिस्तर पर बिताते हैं।
पूरे दिन में कोई एक समय ऐसा जरूर निकालें, जब वह आपकी गोद में सिर रख कर सोए। मां की गोद में बच्चों को बहुत अच्छी नींद आती है। इस दौरान बच्चे के सिर का भार, उसके सिर पर न होकर अपनी मां की गोद में होता है। इस तरह वह और अच्छी तरह आराम कर पाता है।
उल्टा लेटाएं-
हर समय जरूरी नहीं है कि बच्चा पीठ के बल ही लेटे। सोने के दौरान कभी-कभी 10 से 15 मिनट के लिए बच्चे को उसके पेट के बल लेटने दें।
दिन में तीन बार ऐसा कर सकती हैं। इससे सिर चपटा होने से तो बचेगा, साथ ही उसकी मांसपेशियां मजबूत होंगी। यह उसके शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी है।
जब भी बच्चे को उसके पेट के बल लेटाएं, उसकी ओर नजर रखें। यदि वह असहज है या रोता है, तो उसे तुरंत उसे पीठ के बल लेटा दें।
सोते समय मैं अपने बच्चे का सिर सीधा कैसे रखूं?