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सोनोग्राफी कब कब होती है?

Language: Hindi | Published: 13 Oct 2022 | Views: 18
सोनोग्राफी कब कब होती है?

अल्ट्रासाउंड इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि इससे डॉक्टर को ये समझने में मदद मिलती है कि मां की कोख में पल रहा बच्चे की ग्रोथ सही चल रही है या नहीं। इसे एक जरूरी जांच के रूप में माना जाता है और ये गर्भधारण के ग्याहरवें हफ्ते से लेकर तेरहवें हफ्ते के बीच में होता है।

1-प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड वायबेलिटी स्कैन के रूप में जाना जाता है, जिसे गर्भधारण के 6 से 9 सप्ताह में करवाने की सलाह दी जाती है।

2-दूसरा अल्ट्रासाउंड, जिसका नाम न्युकल ट्रांसलुसेंसी यानी NT होता है। इसे एक जरूरी जांच के रूप में माना जाता है और ये गर्भधारण के ग्याहरवें हफ्ते से लेकर तेरहवें हफ्ते के बीच में होता है।

3-इसके बाद डबल मार्कर, जिसमें शिशु की ग्रोथ का सटीक अनुमान लगाया जाता है।

4-गर्भावस्था के 5वें और 6वें महीने में डॉप्लर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।

कुल-मिलाकर कहा जाए तो प्रेगनेंसी पीरियड के दौरान 4 से 5 अल्ट्रासाउंड करवाने में कोई हर्ज नहीं है।
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