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सोनोग्राफी कराने से क्या होता है?

Language: Hindi | Published: 11 Oct 2022 | Views: 20
सोनोग्राफी कराने से क्या होता है?
अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन को ही सोनोग्राफर कहा जाता है। पैरामेडिकल क्षेत्र के ये पेशेवर कुछ विशेष उपकरणों की मदद से मरीजों के रोगग्रस्त अंगों की तस्वीरें लेते हैं। सोनोग्राफी रोग का पता लगाने की एक जांच विधि है। इसके लिए जो मशीन इस्तेमाल में लाई जाती है, उससे अल्ट्रासाउंस वेव्स (उच्च फ्रिक्वेंसी वाली ध्वनि तरंगें) उत्पन्न की जाती हैं। जब इन तरंगों को शरीर के किसी खास हिस्से के ऊपर प्रवाहित किया जाता है, तो सोनोग्राफी मशीन से जुड़ी एक स्क्रीन पर संबंधित अंग, टिश्यू और शरीर के उस हिस्से में हो रहे रक्त संचार की तस्वीरें नजर आने लगती हैं। तस्वीरें लेने की इस प्रक्रिया को ही चिकित्सा क्षेत्र की कामकाजी शब्दावली में सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड स्कैन कहा जाता है।

सोनोग्राफी की जरूरत रोगी के शरीर (खासकर रोगप्रभावित अंग) को अंदर से देखने की यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें शरीर के साथ किसी भी तरह की चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं होती। सोनोग्राफी की इस खासियत के कारण इसका इस्तेमाल शरीर के कई अंगों मसलन पेट, स्तन, हृदय, रक्त नलिकाओं, प्रजनन संबंधी अंगों और पौरुष ग्रंथि आदि की जांच के लिए किया जाता है।

सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी, चिकित्सीय निदान (diagnostics) का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह पराश्रव्य ध्वनि पर आधारित एक चित्रांकन (इमेजिंग) तकनीक है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके कई उपयोग हैं जिसमें से गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी की प्राप्ति सर्वाधिक जानीमानी है।
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