प्रेग्नेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ सकता है भारी, कब अल्ट्रासाउंड करवाना रहता है सही
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड करवाना काफी जरूरी होता है। मगर यह जानना जरूरी है कि क्या इसका कोई नेगेटिव असर भ्रूण या गर्भवती महिला पर पड़ता है। आइए इस संबंध में विस्तार से जानते हैं।
when is ultrasound safe during pregnancy in hindi
प्रेग्नेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ सकता है भारी, कब अल्ट्रासाउंड करवाना रहता है सही
एक समय ऐसा था जब गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण की गतिविधियां, उसके विकास के बारे में हमें कुछ पता नहीं चल पाता था। अल्ट्रासाउंड तकनीक ने यह सब संभव कर दिया है। आज हम अल्ट्रासाउंड की मदद से भ्रूण की पल-पल की खबर रख सकते हैं। मगर इसके साथ ही यह सवाल उठता है कि प्रेग्नेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाना क्या सुरक्षित है?
क्या अल्ट्रासाउंड का कोई नकारात्मक प्रभाव भ्रूण के विकास पर पड़ता है? इस लेख में आज हम इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे।
क्या अल्ट्रासाउंड सुरक्षित है
अलग-अलग उम्र वर्ग से संबंधित कुछ बच्चों पर यह जानने के लिए शोध किया गया कि क्या अल्ट्रासाउंड तकनीक सुरक्षित है? क्या इसका बच्चों के विकास पर कुछ प्रभाव पड़ा है? शोध में मौजूद ऐसे बच्चे भी थे, जिनका पांच बार अल्ट्रासाउंड किया गया था।
विशेषज्ञों ने पाया कि अल्ट्रासाउंड का बच्चों के विकास, बातचीत का ढंग, व्यवहार आदि पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता है। हांलाकि, भ्रूण पर इसका असर जरूर पड़ता है।
कुछ विशेषज्ञ कहते हैं गर्भावस्था के पहले 18 सप्ताह में यदि बार-बार अल्ट्रासाउंड किया जाए, तो भ्रूण पर इसका बहुत मामूली सा असर पड़ता है। हालांकि शोध के दौरान बच्चों के विकास पर इसका कोई असर नजर नहीं आया।
कितनी बार अल्ट्रासाउंड करवा सकते हैं?
हर गर्भवती महिला के लिए अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। अल्ट्रासाउंड की मदद से डाॅक्टर महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर पैनी नजर रख सकते हैं। सामान्य प्रेग्नेंसी में दो अल्ट्रासाउंड करने का सुझाव दिया जाता है।
पहला अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की पहली तिमाही में किया जाता है जबकि दूसरा अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही के आखिरी चरण में होता है।
क्या कई बार अल्ट्रासाउंड करवा सकती हैं?
गर्भवती महिला का शारीरिक स्वास्थ्य यह तय करता है कि उसे कितने अल्ट्रासाउंड की जरूरत है। अधिकतम तीन से चार अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है, बशर्ते महिला की स्थिति बिल्कुल सही नहीं है। एक्सपर्ट भी ज्यादा अल्ट्रासाउंड का सुझाव नहीं देते हैं। भ्रूण की स्थिति ज्यादा खराब होने पर अल्ट्रासाउंड के लिए कहा जा सकता है।
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड करवाने का नुकसान
अलग-अलग शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि अल्ट्रासाउंड की वजह से भ्रूण के विकास पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता है। यहां तक कि जन्म के बाद भी बच्चे का विकास, सोचने-समझने की क्षमता, आध्यात्मिक समझ, बातचीत के तौर तरीके आदि में किसी तरह का कोई प्रभाव नजर नहीं आता है।
इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड की वजह से बच्चे में किसी तरह की गंभीर बीमारी जैसे कैंसर नहीं होती है। अल्ट्रासाउंड तकनीक गर्भवती महिला के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
अल्ट्रासाउंड करवाने के फायदे
अल्ट्रासाउंड करवाने के दौरान महिलाओं को सुई, कट नहीं लगता है।
अल्ट्रासाउंड बिल्कुल दर्द रहित तकनीक है।
अल्ट्रासाउंड एक्स-रे और सिटी स्कैन से ज्यादा सुरक्षित है।
अल्ट्रासाउंड का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।
अल्ट्रासाउंड बच्चे की छवि को बिल्कुल स्पष्ट दिखाता है, जो कि एक्स-रे में सभव नहीं है।
आज की तारीख में अल्ट्रासाउंड हर गर्भवती महिला बहुत आसान से करवा सकती है। यह ज्यादा महंगा भी नहीं है।
सोनोग्राफी कितने महीने में कराना चाहिए?