जब कोई महिला गर्भवती हो जाती है तो उसे समय-समय पर गर्भवती होने से लेकर के बच्चा पैदा करने तक अपना सोनोग्राफी टेस्ट करवाना होता है, जिसे अल्ट्रासाउंड टेस्ट भी कहा जाता है। अल्ट्रासाउंड टेस्ट किसी अनुभवी डॉक्टर के द्वारा ही करवाया जाना उचित माना जाता है।
अल्ट्रासाउंड टेस्ट करके डॉक्टर यह जानकारी प्रेग्नेंट महिला और उसके घर वालों को देते हैं कि, वर्तमान में पेट में पल रहे बच्चे की स्थिति कैसी है। क्या उसे कोई समस्या है अथवा वह बिल्कुल स्वस्थ है। इसके द्वारा महिला के पेट में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है और यह देखा जाता है कि उसका विकास सही प्रकार से हो रहा है या नहीं। सोनोग्राफी टेस्ट में बच्चे का पूरा आकार दिख जाता है। इससे यह पता चल जाता है कि बच्चे की बॉडी के सभी अंग बने हैं अथवा नहीं।
इस टेस्ट को करने के लिए मशीन के द्वारा महिला के पेट में पल रहे बच्चे की स्कैनिंग की जाती है, जिसके कारण बच्चे की स्थिति का प्रिंट आउट एक्स-रे टाइप के एक प्लास्टिक के पेपर में आता है और फिर डॉक्टर उसकी जांच करके महिला के पेट में पल रहे बच्चे की रिपोर्ट तैयार करते हैं।
सोनोग्राफी रिपोर्ट क्या है?