गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड के नुकसान?

ज्यादा अल्ट्रासाउंड गर्भ में पल रहे बच्चे के लिये खतरनाक
बार-बार अल्ट्रासाउंड कराना गर्भ में पल रहे शिशु के लिये खतरनाक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक के परामर्श पर ही अल्ट्रासांउड कराना चाहिए। एक गोष्ठी में गर्भवतियों को सलाह दी।
प्रतिदिन करीब 100 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं।
अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी में क्या अंतर है?

“अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी क्या है और इनमे क्या अंतर होता है?”. एक सोनोग्राफर द्वारा ही अल्ट्रासाउंड किया जाता है इसमें एक मेडिकल टेस्ट होता है जिसमें उच्च आवृति वाले ध्वनि चित्रों का उपयोग करते हुए शरीर के अंदर के सजीव चित्रों को देखा जाता है। इसे सोनोग्राफी (Sonography )
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अल्ट्रासाउंड में क्या क्या पता चलता है?

कैसे काम करती है अल्ट्रासाउंड मशीन
कुछ सालों पहले तक मेडिकल टेक्नोलाजी इतनी विकसित नही थी जितनी आज के दौर में है। डॉक्टर्स को अपने मरीज का हाल चाल उसकी नब्ज देख कर लेना होता था। वह अपने अनुभव से मरीज की बीमारी का पता लगा लेता था। आज मशीनो का
सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड में क्या अंतर है?

इसे सोनोग्राफी (Sonography ) भीकहा जाता है। अल्ट्रासाउंड एक ऐसा तरीका है जिसमे बिना किसी तरह का चीरा लगाए अल्ट्रासाउंड के जरिए डॉक्टर शरीर के अंगों, वाहिकाओं और कोशिकाओं में उत्पन्न समस्याओं का पता लगाते हैं. आज हम आपको इन्ही के विषय में बताने जा रहे हैं. तो चलिए शुरू
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बच्चेदानी का अल्ट्रासाउंड कैसे होता है?

योनि अल्ट्रासोनोग्राफ़ी एक चिकित्सा अल्ट्रासोनोग्राफी है जो योनि में श्रोणि गुहा के भीतर अंगों को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड ट्रांसड्यूसर (या "जांच") करती है। योनि अल्ट्रासाउंड योनि में डाली गई ट्रांसड्यूसर द्वारा लिया गया अल्ट्रासाउंड स्कैन होता है। यह भ्रूण, गर्भाशय और प्लेसेंटा की एक स्पष्ट तस्वीर देता है। इसे
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