गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड के नुकसान?

ज्यादा अल्ट्रासाउंड गर्भ में पल रहे बच्चे के लिये खतरनाक
बार-बार अल्ट्रासाउंड कराना गर्भ में पल रहे शिशु के लिये खतरनाक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक के परामर्श पर ही अल्ट्रासांउड कराना चाहिए। एक गोष्ठी में गर्भवतियों को सलाह दी।
प्रतिदिन करीब 100 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं।
अल्ट्रासोनोग्राफी क्या है?

प्रसूतिशास्र अल्ट्रासोनोग्राफी
प्रसूतिशास्र अल्ट्रासोनोग्राफी या स्त्री रोग विज्ञान सोनोग्राफी चिकित्सा सोनोग्राफी के आवेदन को संदर्भित करता है, जैसे की मादा श्रोणि अंग (विशेष रूप से गर्भाशय, अंडाशय, और फलोपियन ट्यूब) साथ ही मूत्राशय, एडनेक्स, और डगलस के पाउच। प्रक्रिया श्रोणि में अन्य चिकित्सकीय प्रासंगिक निष्कर्षों का कारण बन सकती है।
अनुक्रम
अल्ट्रासाउंड कितने प्रकार का होता है in English?

What Are the Different Types of Ultrasound?
Different ultrasound techniques exist for different conditions.
Hysterosonography, also called:
Saline Infusion Sonography
Sonohysterography
Ultrasound - Uterus
Obstetric Ultrasound, also called:
Sonography - Obstetric
Ultrasound - Obstetric
Ultrasound - Abdomen, also called:
अंडकोष का अल्ट्रासाउंड कैसे होता है?

Testicular Ultrasound: टेस्टिकुलर अल्ट्रासाउंड क्या है?
परिचय
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महत्वपूर्ण जानकारी
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प्रक्रिया
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रिजल्ट
Testicular Ultrasound: टेस्टिकुलर अल्ट्रासाउंड क्या है?
परिचय
टेस्टिकुलर अल्ट्रासाउंड (Testicular Ultrasound) क्या है?
टेस्टिकुलर अल्ट्रासाउंड अंडकोष से संबंधित परिक्षण है। जिसका मुख्य उद्देश्य अंडकोष यानि कि टेस्टिकल (Testicles) संबंधित समस्याओं की जांच करना है। इसमें उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों (high-frequency sound waves) के जरिए अंडकोष और
टीवीएस अल्ट्रासाउंड कैसे होता है?

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (टीवीएस) महिला के प्रजनन अंगों के रास्ते बहुत ही स्पष्ट रूप से देखा जाता है। महिलाओं में भांजपंन के कारण का पता लगाना के लिए ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड ज़रुरी है|
ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound) मतलब | योनि के माध्यम से आंतरिक स्कैन | ।यह एक बहुत ही
अल्ट्रासाउंड खाली पेट होता है क्या?

Ultrasound करवाने से पहले और बाद में इन 4 बातों का जरूर रखें ध्यान
अल्ट्रासाउंड एक ऐसी उन्नत तकनीक है जिसमें उच्च आवृति ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करके शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं।
Ultrasound करवाने से पहले और बाद में इन 4 बातों का जरूर रखें ध्यान
अल्ट्रासाउंड टेस्ट खाली
अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी में क्या अंतर है?

“अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी क्या है और इनमे क्या अंतर होता है?”. एक सोनोग्राफर द्वारा ही अल्ट्रासाउंड किया जाता है इसमें एक मेडिकल टेस्ट होता है जिसमें उच्च आवृति वाले ध्वनि चित्रों का उपयोग करते हुए शरीर के अंदर के सजीव चित्रों को देखा जाता है। इसे सोनोग्राफी (Sonography )
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अल्ट्रासाउंड में क्या क्या पता चलता है?

कैसे काम करती है अल्ट्रासाउंड मशीन
कुछ सालों पहले तक मेडिकल टेक्नोलाजी इतनी विकसित नही थी जितनी आज के दौर में है। डॉक्टर्स को अपने मरीज का हाल चाल उसकी नब्ज देख कर लेना होता था। वह अपने अनुभव से मरीज की बीमारी का पता लगा लेता था। आज मशीनो का
सोनोग्राफी टेस्ट क्या है?

सोनोग्राफी
सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी, चिकित्सीय निदान (diagnostics) का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह पराश्रव्य ध्वनि पर आधारित एक चित्रांकन (इमेजिंग) तकनीक है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके कई उपयोग हैं जिसमें से गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी की प्राप्ति सर्वाधिक जानीमानी है।
भौतिकी में ऐसी तरंगो को पराश्रव्य
नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या खाएं?

नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो 9वें महीने में जरूर खाएं ये चीजें
जानिए प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में आहार में किन चीजों को शामिल कर आप अपनी नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस को बढ़ा सकती हैं।
गर्भावस्था का नौवांं महीना बाकी के सभी महीनों से बहुत अलग और नाजुक होता है। अब बस