सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड में क्या अंतर है?

इसे सोनोग्राफी (Sonography ) भीकहा जाता है। अल्ट्रासाउंड एक ऐसा तरीका है जिसमे बिना किसी तरह का चीरा लगाए अल्ट्रासाउंड के जरिए डॉक्टर शरीर के अंगों, वाहिकाओं और कोशिकाओं में उत्पन्न समस्याओं का पता लगाते हैं. आज हम आपको इन्ही के विषय में बताने जा रहे हैं. तो चलिए शुरू
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सोनोग्राफी क्या होता है?

सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी, चिकित्सीय निदान (diagnostics) का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह पराश्रव्य ध्वनि पर आधारित एक चित्रांकन (इमेजिंग) तकनीक है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके कई उपयोग हैं जिसमें से गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी की प्राप्ति सर्वाधिक जानीमानी है।
भौतिकी में ऐसी तरंगो को पराश्रव्य
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बॉय और गर्ल?

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बॉय और गर्ल (Baby gender) कैसे पता करे इन हिंदी
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बॉय और गर्ल कैसे पता करे इन हिंदी, baby gender अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बॉय और गर्ल in hindi – अल्ट्रासाउंड करवाने के बहुत से कारण हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण है. गर्भ में पल रहा शिशु गर्ल है
3 माह की गर्भवती अल्ट्रासाउंड?

मुझे तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड की जरुरत क्यों होती है?
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाने का सबसे आम वजह यह पता करना होता है कि शिशु सामान्य ढंग से बढ़ रहा है या नहीं।
आपको गर्भावस्था के 28 से 32 सप्ताह के बीच ग्रोथ और फीटल वेलबींग स्कैन कराने
सोनोग्राफी कब करवानी चाहिए?

Pregnancy Tips: प्रेग्नेंसी में इतनी बार करवाना चाहिए अल्ट्रासाउंड, जानें कब और कैसे करवाएं सोनोग्राफी
मां बनना किसी भी महिला के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है। इस दौरान महिलाएं कई सारी मिक्स्ड फीलिंग से गुजरती है। कई महिलाओं को शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो कई के
सोनोग्राफी के फायदे?

अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन को ही सोनोग्राफर कहा जाता है। पैरामेडिकल क्षेत्र के ये पेशेवर कुछ विशेष उपकरणों की मदद से मरीजों के रोगग्रस्त अंगों की तस्वीरें लेते हैं। सोनोग्राफी रोग का पता लगाने की एक जांच विधि है। इसके लिए जो मशीन इस्तेमाल में लाई जाती है, उससे अल्ट्रासाउंस वेव्स (उच्च
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सोनोग्राफी क्या है?

सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी, चिकित्सीय निदान (diagnostics) का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह पराश्रव्य ध्वनि पर आधारित एक चित्रांकन (इमेजिंग) तकनीक है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके कई उपयोग हैं जिसमें से गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी की प्राप्ति सर्वाधिक जानीमानी है।
भौतिकी में ऐसी तरंगो को पराश्रव्य
बच्चेदानी का अल्ट्रासाउंड कैसे होता है?

योनि अल्ट्रासोनोग्राफ़ी एक चिकित्सा अल्ट्रासोनोग्राफी है जो योनि में श्रोणि गुहा के भीतर अंगों को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड ट्रांसड्यूसर (या "जांच") करती है। योनि अल्ट्रासाउंड योनि में डाली गई ट्रांसड्यूसर द्वारा लिया गया अल्ट्रासाउंड स्कैन होता है। यह भ्रूण, गर्भाशय और प्लेसेंटा की एक स्पष्ट तस्वीर देता है। इसे
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सोनोग्राफी कैसे की जाती है?

कैसे काम करती है अल्ट्रासाउंड मशीन
कुछ सालों पहले तक मेडिकल टेक्नोलाजी इतनी विकसित नही थी जितनी आज के दौर में है। डॉक्टर्स को अपने मरीज का हाल चाल उसकी नब्ज देख कर लेना होता था। वह अपने अनुभव से मरीज की बीमारी का पता लगा लेता था। आज मशीनो का
गर्भवती सोनोग्राफी?

प्रेग्नेंसी में इतनी बार करवाना चाहिए अल्ट्रासाउंड, जानें कब और कैसे करवाएं सोनोग्राफी
हेल्थ डेस्क : मां बनना किसी भी महिला के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है। इस दौरान महिलाएं कई सारी मिक्स्ड फीलिंग से गुजरती है। कई महिलाओं को शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो कई