नवजात शिशु को भाप कैसे दें?

नवजात शिशु को भाप किस तरह दिया जाये?
शिशु अपने जीवन के पहले दो साल में करीब आठ से दस बार सर्दी और जुकाम का शिकार होता है। इसमें सबसे ज्यादा शिशु बंद नाक के कारण परेशान होता है। नवजात शिशु को भाप देने से उसका नाक खुल जाता है और
क्या बच्चों के लिए भाप खराब है?

बच्चों को भाप (स्टीम) देने से उनके बंद नाक खुलते हैं?
बच्चों को भाप (स्टीम) दिलाने से उनका बंद नाक खुल जाता है। भाप (स्टीम) जब शिशु साँस दुवारा अंदर लेता है तो उसके छाती में जमे कफ (mucus - बलगम जमा) के कारण जो जकड़न है वो ढीला पड़
छोटे बच्चों को भाप कैसे दिया जाता है?

बच्चे को सर्दी-खांसी है तो उसे भाप दिलाइए, जानिए स्टीम दिलाते समय किन बातों का ध्यान रखें
लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इस वायरस की चपेट में बुजुर्ग और युवा तो थे ही, अब बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्चों
बच्चों को भाप देने से क्या फायदा होता है?

हां, सांस के जरिये भाप अंदर लेने से शिशु की बंद नाक खुलने में मदद मिल सकती है। नम हवा बच्चे की नाक में जमा श्लेम ढीला कर सकती है और इससे उसे सांस लेने में आसानी हो सकती है। यह खांसी और गले में खराश को भी कम करने
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बच्चों को भाप कब देनी चाहिए?

हां, सांस के जरिये भाप अंदर लेने से शिशु की बंद नाक खुलने में मदद मिल सकती है। नम हवा बच्चे की नाक में जमा श्लेम ढीला कर सकती है और इससे उसे सांस लेने में आसानी हो सकती है। यह खांसी और गले में खराश को भी कम करने
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क्या डायपर बच्चे के लिए हानिकारक है?

मां वर्किंग हो या फिर कोई हाउसवाइफ, बच्चों को डायपर पहनाने से दोनों का ही जीवन थोड़ा आसान जरूर हो जाता है। डायपर का उपयोग बेहद सुविधाजनक होने के साथ इन्हें धोने के झंझट से भी बचाता है। खास बात यह है कि ये बाजार में आसानी से उपलब्ध होते
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कौन सा डायपर बच्चों के लिए सुरक्षित है?

आजकल जन्म के बाद पहले दिन से ही शिशु को डायपर पहनाना शुरू कर दिया जाता है। डायपर लंबे समय तक पेशाब को सोख सकते हैं जिससे बच्चा आराम से चैन की नींद ले पाता है और उसे गीलापन महसूस नहीं होता है।
उम्र के हिसाब से दिनभर में कई बार
मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे बच्चे को छाती में संक्रमण है?

शिशु के छाती में इंफेक्शन के होते हैं ये 6 लक्षण, जानें इस बीमारी का कारण और बचाव के तरीके
छोटे बच्चों संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाते है और इससे उनका इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो सकता है।
शिशु के छाती में इंफेक्शन के होते हैं ये 6
बच्चे को जन्म घुट्टी कैसे देते हैं?

शिशु को दी जाने वाली जन्म घुट्टी में अश्वगंधा, अतिविष, मुरुडशेंग, बाल हिरडा, जायफल, हल्दी की जड़, सौंठ, खारीक, बादाम, जेष्ठमध, डिकेमाली, वेखंड और काकड शिंगी से घुट्टी बनाई जाती है।
जन्म घुट्टी को बाल घुट्टी भी कहते हैं और ये एक पारंपरिक भारतीय आयुर्वेदिक काढ़ा है जिसे मां के दूध
3 महीने के बच्चे को क्या देना चाहिए?

स्तन का दूध या फॉर्मूला दूध पिलाना
स्तनपान करवाना जारी रखें;
जिन शिशुओं को बोतल से दूध पिलाया जाता है, उन्हें आम तौर पर प्रतिदिन लगभग 2 से 3 से बार और लगभग 500 से 600 मिली दूध पिलाने की ज़रूरत होती है;