1 महीने का बच्चा दिन में कितनी बार पॉटी करता है?

नवजात बच्चों को कितनी बार मल त्याग करना चाहिए
In this Article
एक नवजात शिशु को कितनी बार मल त्याग करना चाहिए?
ब्रेस्टफीडिंग कराने के बाद बच्चा कितनी बार मल त्याग करता है?
फॉर्मूला फीडिंग कराने के बाद बच्चा कितनी बार मल
छोटे बच्चे थूक क्यों निकालते हैं?

इन 4 कारणों से बच्चों में होती है बार-बार थूक फेंकने की आदत, पेट में कीड़ों की नहीं होती कोई समस्या
अगर आप भी अपने बच्चे की थूक फेंकने की आदत से परेशान हैं तो एक्सपर्ट से जानें किन कारणों से होता है ऐसा।
बार-बार थूकने की आदत आपने कई लोगों में
नवजात शिशु को कब पानी पिलाना चाहिए?

स्तनपान करने वाले बच्चों को अलग से पानी पीने की जरूरत नहीं होती है क्योंकि मां के दूध में ही 80 फीसदी से ज्यादा पानी होता है और इसी से शिशु को आवश्यक तरल पदार्थ मिल जाते हैं। वहीं, बोतल से दूध पीने पर फॉर्मूला मिल्क से शिशु का शरीर
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डिलीवरी के बाद गर्म पानी पीने से क्या होता है?

डिलीवरी के बाद कैसा पानी पीना चाहिए, ठंडा या गर्म?
प्रसव के पहले दिन से ही महिलाओं को गर्म (गुनगुना) पानी व अन्य पेय पीने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिला को गर्म पानी पीने देना, सेहत के नजरिये से ठीक होता
क्या गर्म पानी पीने से स्तन का दूध बढ़ता है?

बच्चे काे दूध पिलाती हैं तो खुद दिन में जरूर पिएं इतना पानी
शरीर को पानी की बहुत जरूरत होती है और अगर इसकी कमी हो जाए तो शरीर को कई बीमारियां घेर लेती हैं।
आमतौर पर स्तनपान करवाने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट में एक दिन में 750 मिली दूध बनता है।
बच्चा होने के बाद कितना पानी पीना चाहिए?

शरीर में पानी की सही मात्रा बॉडी को हाइड्रेट रखती है और शरीर से वेस्ट आसानी से बाहर निकल पाते हैं. सही मात्रा में पानी पीने से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, ब्लैडर इन्फेक्शन और किडनी इन्फेक्शन का खतरा भी कम हो जाता है. गर्भवती महिलाओं के लिए सही मात्रा में पानी
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डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक ब्लीडिंग होती है?

खून के थक्के आने के सामान्य लक्षण
खून के थक्के जैली की तरह होते हैं। इनमें म्यूकस या ऊतक भी हो सकते हैं और ये गोल्फ की गेंद जितने बड़े भी हो सकते हैं। डिलीवरी के बाद हर हफ्ते खून के थक्के आने और ब्लीडिंग की मात्रा बदल सकती है। जानिए
नार्मल डिलीवरी के टेक कितने दिन में ठीक होते हैं?

नॉर्मल डिलीवरी के बाद लगे टांकों की इस तरह करेंगी देखभाल, तो वजाइना का नहीं होगा बुरा हाल
नॉर्मल डिलीवरी के बाद वजाइना में टांके लगते हैं और प्रसव के बाद इन टांकों की सही देखभाल करना बहुत जरूरी है
ताकि
इंफेक्शन या किसी और तरह की परेशानी से बचा जा सके।
सिजेरियन
नॉर्मल डिलीवरी के बाद टांके लगाने के बाद आप कैसे सोते हैं?

नॉर्मल डिलीवरी के बाद वजाइना में टांके लगते हैं और प्रसव के बाद इन टांकों की सही देखभाल करना बहुत जरूरी है ताकि इंफेक्शन या किसी और तरह की परेशानी से बचा जा सके।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद लगे टांकों को भरने में कम समय लगता है और अगर अच्छी देखभाल
क्या नॉर्मल डिलीवरी में टांके लगाना अनिवार्य है?

सिजेरियन डिलीवरी में तो टांके लगते ही हैं लेकिन नॉर्मल डिलीवरी में भी टांके आते हैं। नॉर्मल डिलीवरी के दौरान वजाइना की दीवार हल्की सी टियर (छिल) हो जाती है और इसकी टियरिंग को बढ़ने से रोकने और इंफेक्शन को दूर करने के लिए टांके लगाए जाते हैं।
आमतौर पर शुरुआत