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कम लग रहा है गर्भस्थ शिशु का वजन, प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में ये चीजें खाकर बढ़ा सकती हैं वेट
यदि गर्भवती महिला को अपने बच्चे का वजन कम महसूस हो रहा है, तो वह प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन महीनों में अपनी डाइट की मदद से बच्चे का वजन बढ़ा सकती
विकिपीडिया, मुक्त ज्ञानकोशातून
सस्तन प्राण्यांतील मादीमध्ये पोटात असलेला प्रजननाचा अवयव. हा अवयव इंग्लिश भाषा टी (T) आकाराचा असतो. वरच्या दोन बाजू गर्भनलिकांना जोडलेल्या असतात. खालील बाजूस गर्भाशयमुख व योनी असते.
प्रजननाच्या हेतूने कार्य करणाऱ्या मानवी प्रजननसंस्थेतील स्त्री प्रजननसंस्थेचा भाग असलेला हा अवयव आहे. फलित बीजांड (गर्भ) रुजवणे, सुरक्षित वातावरणात वाढवणे व योग्य
गोरा बच्चा देने वाला केसर, पेट में ही ले सकता है उसकी जान, जानिए किस महीने से खाना चाहिए
कहते हैं कि प्रेग्नेंसी में केसर खाने से गोरा और सुंदर बच्चा पैदा होता है लेकिन अगर इसे सही समय और सही मात्रा में ना लिया जाए तो इसके नुकसान भी हो
प्रसवपूर्व जांच
प्रसवपूर्व जांच
गर्भवती महिला की प्रसवपूर्व जांचें
प्रसवपूर्व जांच के फायदे
प्रसवपूर्व जांच
प्रश्न -1 प्रसवपूर्व जांच क्या होती है?
जबाब - प्रसवपूर्व जांच गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का क्रमबद्ध निरीक्षण होता है तथा इस दौरान गर्भवती महिला की विभिन्न जांचें
प्रेग्नेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ सकता है भारी, कब अल्ट्रासाउंड करवाना रहता है सही
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड करवाना काफी जरूरी होता है। मगर यह जानना जरूरी है कि क्या इसका कोई नेगेटिव असर भ्रूण या गर्भवती महिला पर पड़ता है। आइए इस संबंध में विस्तार से जानते हैं।
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प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कब और कितनी बार करवाना चाहिए? जानें कितना जरूरी है समय पर अलट्रासाउंड
प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कब और कितनी बार करवाना चाहिए? जानें कितना जरूरी है समय पर अलट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि इससे डॉक्टर को ये समझने में मदद मिलती है कि मां की कोख
प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कब और कितनी बार करवाना चाहिए? जानें कितना जरूरी है समय पर अलट्रासाउंड
प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड कब और कितनी बार करवाना चाहिए? जानें कितना जरूरी है समय पर अलट्रासाउंड
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गर्भारपण
स्त्रीच्या गर्भाशयातील भ्रूण किंवा गर्भ म्हटल्या जाणाऱ्या एक किंवा अधिक अपत्यांची वाढ म्हणजे गर्भावस्था किंवा गरोदरपण होय. गर्भावस्थेत जुळे किंवा तिळ्यांप्रमाणे अनेक सगर्भता असू शकतात. गर्भधारणेनंतर सुमारे ३८ आठवड्यांत प्रसूती होते; रजोचक्राची लांबी चार आठवडे असणाऱ्या स्त्रियांमध्ये हा काळ अंतिम सामान्य रजोकालाच्या प्रारंभापासून सुमारे ४० आठवडे इतका येतो. सस्तनी प्राण्यांच्या
काही वेळा बाळे स्तनपान घेतल्यानंतर शी करतात. याचे कारण म्हणजे, त्याचे पोट दूधाने भरलेले असते, त्यामुळे त्याला शी लागते. ज्या बाळांना स्तनपान दिले जाते त्यांची शी सामान्यपणे पिवळसर असते जिचा वास गोड असतो व ती मऊ असते. ते १ महिन्याचे झाल्यानंतर, बहुतेक बाळांना दिवसातून १ किंवा २ वेळा शी होते.
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क्या बिना पीरियड के प्रेग्नेंट हो सकती है? - Can You Get Pregnant Without Having a Period?
पीरियड के बिना ओवुलेट करना - Ovulating Without Getting Your Period
निष्कर्ष :
महिलाओं में
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