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अक्सर मांएं बच्चे के छह महीने के होने के बाद सेरेलेक खिलाना शुरू करती हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको बच्चे को सेरेलेक ही खिलाना है। आप घर पर भी बच्चे के लिए सेरेलेक के पौष्टिक विकल्प तैयार कर सकती हैं। जन्म के बाद छह महीने तक शिशु
Continue reading wordpress ago hindi 4 views शिशु के नाखून कैसे काटें?
शिशु के नाखून काटने के लिए उसे ऐसी जगह पर लेकर बैठें जहां पर्याप्त उजाला हो।
जब बच्चा सो रहा हो तो उस समय नाखून काटें।
बच्चे की उंगली को अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली से
स्तनपान करने वाले बच्चों को अलग से पानी पीने की जरूरत नहीं होती है क्योंकि मां के दूध में ही 80 फीसदी से ज्यादा पानी होता है और इसी से शिशु को आवश्यक तरल पदार्थ मिल जाते हैं। वहीं, बोतल से दूध पीने पर फॉर्मूला मिल्क से शिशु का शरीर
Continue reading wordpress ago hindi 11 viewsब्रिटेन की वेबसाइट द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, दोहरी कोख की स्थिति को यूट्रस डाईडेल्फिस कहा जाता है। खबरों के मुताबिक, विशेषज्ञ डॉक्टर बताते हैं कि यह एबनॉर्मेलिटी यानी असाधारण स्थिति जन्मजात होती है। महिलाओं में दो कोख हो सकती हैं और कुछ मामलों में दो योनि भी हो
Continue reading wordpress ago hindi 10 viewsबाइकॉर्नुएट गर्भाशय: दिल के आकार का गर्भाशय। धनुषाकार गर्भाशय: एक उभयलिंगी गर्भाशय के समान लेकिन कम डुबकी या दिल के आकार के साथ। सेप्टेट गर्भाशय: जब आपका गर्भाशय एक झिल्ली द्वारा दो भागों में विभाजित हो जाता है। गेंडा गर्भाशय: जब आपके पास एक फैलोपियन ट्यूब और एक अनियमित आकार
Continue reading wordpress ago hindi 26 viewsगर्भाशय का आकार बढ़ने के अन्य कारण पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम, गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग और गर्भाशय कैंसर हैं। गर्भाशय की सूजन में इसका आकार बढ़ने के अलावा पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग, दर्द, शारीरिक संबंध बनाने पर दर्द, पेट के निचले भाग में दर्द और पेट भारी लगना आदि
Continue reading wordpress ago hindi 7 viewsइसे सुनेंरोकेंमहिलाओं में यह मूत्र की थैली और मलाशय के बीच में होती है तथा गर्भाशय का झुकाव आगे की ओर होने पर उसे एन्टीवर्टेड कहते है अथवा पीछे की तरफ होने पर रीट्रोवर्टेड कहते है। गर्भाशय के झुकाव से बच्चे के जन्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गर्भाशय
Continue reading wordpress ago hindi 3 viewsहर महिला के गर्भाशय का साइज अलग होता है। आमतौर पर इसका वजन 70 से 125 ग्रम होता है। हालांकि, उम्र और हार्मोनल स्थिति जैसे कारकों के आधार पर यूट्रेस का साइज निर्भर करता है।
Continue reading wordpress ago hindi 16 views जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में परेशानी आ रहीहै, उन्हें अंदाजा भी नहीं होता, कि उनके यूटरस या बच्चेदानी में कमजोरी है। गर्भाशय की मांसपेशियां शरीर में सबसे ज्यादा मजबूत होती हैं, फिर भी हमारी गलत जीवनशैली, खराब पोषण और गतिहीन आदतें बच्चेदानी को कमजोर बना देती हैं।
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