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किसी भी महिला में दो बच्चेदानी होने का प्रतिशत 0.003 रहता है। यानी तीन लाख में से किसी एक महिला को इस तरह की समस्या होती है।
गर्भाशय स्त्री जननांग है। यह 7.5 सेमी लम्बी, 5 सेमी चौड़ी तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है। इसका वजन लगभग 35 ग्राम
डिलीवरी नॉर्मल हो या सीजेरियन, शरीर को ताकत हासिल करने में समय लगता है. इसलिए डिलीवरी के बाद फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. डॉक्टर कहते हैं कि डिलवरी के बाद सेक्स करने से पहले 4 से 6 सप्ताह तक का गैप रखना जरूरी है.
Continue reading wordpress ago hindi 20 views 1 एब्डोमीनल हिस्टेरेक्टोमी (Abdominal Hysterectomy)
इस प्रकार के ऑपरेशन में पेट के नीचे 5 इंच लंबा चीरा लगाया जाता है. फिर पेट की मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं व अन्य अंग को ध्यान से हटाकर गर्भाशय को अपनी जगह पर रखने वाले लिंगामेंट्स को काटकर गर्भाशय को अलग
अलग-अलग महिला के लिए बच्चेदानी का ऑपरेशन के बाद का रिकवरी टाइम अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर महिला 6 सप्ताह के भीतर पूरी तरह से रिकवर हो जाती है।
प्रक्रिया के बाद क्या होता है?
सर्जरी के 1 या 2 दिन के बाद आईवी और कैथेटर को निकाल दिया जाता है।
संक्रमण का खतरा ...
दर्द का अहसास होना ...
आसपास के अंगों में चोट लगना ...
एनीमिया की संभावना ...
जल्दी मीनोपॉज आना ...
योनि को होता है नुकसान ...
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी परिस्थिति तब बनती है जब महिला में यूट्रस दो छोटी-छोटी ट्यूब में बंट जाता है। ये दोनों ही ट्यूब जुड़ी हुई हो सकती हैं और ये अंदर से खोखली होती हैं। गर्भाशय के औसत आकार की अपेक्षा ये दोनों थोड़े छोटे होते हैं। ऐसी स्थिति क्यों
Continue reading wordpress ago hindi 10 viewsबिना यूट्रस की भी मां बन सकती हैं। यूट्रस ट्रांसप्लांट करके ऐसी महिलाओं को मां बनने का सपना पूरा हो सकता है। ऐसी महिलाएं जिनके पास यूट्रस (गर्भाशय) नहीं है या किसी बीमारी की वजह से उनका यूट्रस निकाल दिया गया है, अब वो इस स्थिति में भी मां बन
Continue reading wordpress ago hindi 11 viewsहम सभी जानते है। कि जब शिशु के शरीर का विकाश हो रहा होता है। उस वक्त सही विकाश के लिए सिर्फ अस्तानपन या फार्मूला मिल्क पर निर्भर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कुछ अर्ध - थोश या थोश आहार शामिल करने ही पड़ते हैं। उन्ही में से
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गुड़ में फैट नहीं होता है तो आप इसे रात के समय खा सकते है पर नौ से दस ग्राम से ज्यादा गुड़ रात के समय न खाएं। गुड़ खाने से पाचन इंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती। जो लोग रात में कब्ज, पेट में
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 6 महीने तक ही शिशु को मां का दूध पिलाना चाहिए और इसके बाद दो साल की उम्र तक उसे धीरे-धीरे ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए। यदि आप दो साल की उम्र के बाद भी अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं तो इससे मां
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